A Multi Disciplinary Approach To Vaastu Energy

Vastu For Bedroom - बेडरूम के लिए वास्तु टिप्स

बेडरूम के लिए वास्तु टिप्स (Vastu Tips For Bedroom)

कई बार हम किसी काम को सफल बनाने के लिए अपना 100% उसमें लगा देते हैं लेकिन इसके बावजूद रिजल्ट हमारी सोच से बिल्कुल उलट ही होता है, और हाथ लगती है असफलता। चाहे वो ऑफिस में प्रमोशन की बात हो, एग्जाम में फर्स्ट क्लास रिजल्ट की या सक्सेसफुल लाइफ की। हर बार बनता काम भी बिगड़ जाता है। इसके लिए आपकी नींद भी जिम्मेदार हो सकती है। क्योकि नींद का संबंध आपकी एनर्जी से होता है। जितनी गहरी नींद लेंगे उतने ही एनर्जी से भरपूर रहेंगे। लेकिन नींद देर से आती है या रात में बार- बार आंख खुल जाती है, तो इसका कारण आपके बेडरूम का खराब वास्तु भी हो सकता है।

शयन कक्ष वो स्थान है जहाँ हर व्यक्ति प्रतिदिन अपने सोने की आदत के अनुसार कम से कम 6 से 8 घंटे बिताता है। और सोने का यही समय होता है जब हमारा अवचेतन मस्तिष्क सबसे ज्यादा ग्रहणशील अवस्था में होता है। ऐसे में शयन कक्ष का वास्तु हमें ना सिर्फ शारीरिक तौर पर प्रभावित करता है बल्कि यह हमारे अवचेतन मस्तिष्क पर भी गहरा प्रभाव डालता है। वास्तु शास्त्र घर में एक ऐसा वातावरण निर्मित करता है जिससे की व्यक्ति और उसका अवचेतन मस्तिष्क सोते समय एकदम शांत और सुरक्षित महसूस करे। तो आइये जानते है की शयन कक्ष यानि की बेडरूम के लिए वास्तु शास्त्र क्या कहता है।

वास्तु में दिशाओं का महत्व होता है। किसी दिशा से आने वाली ऊर्जा आपको किस प्रकार से फायदा पहुंचा सकती है, यह शास्त्र इसी पर निर्भर है। वास्तु में हर जगह और कमरे के लिए एक निश्चित स्थान बताया गया है। बेडरूम रूम घर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। आइए आपको बताते है कि आपके बेडरूम का वास्तु कैसा होना चाहिए ताकि आपके जीवन  में सदा खुशियों का आगमन होता रहे।

बेडरूम किस दिशा में होना चाहिए -

परिवार में जितने लोग होते हैं उनके बेडरूम भी अलग- अलग होते हैं। वास्तु में इन अलग- अलग बेडरूम की दिशाएं भी अलग ही बताई गई हैं। तो आइए जानते हैं कि वास्तु के हिसाब से घर के किस सदस्य का बेडरूम किस दिशा में होना चाहिए।

  • मास्टर बेडरूम जिसमें कि घर का मुखिया सोता है वो नैऋत्य कोण (दक्षिण- पश्चिम का कोना) में होना चाहिए। ये उनके लिए बहुत शुभ माना जाता है।
  • बच्चों का कमरा पश्चिम की दिशा में होना चाहिए। ये उनकी प्रगति  में किसी तरह का अवरोध उत्पन्न नहीं होने देती हैं।
  • अविवाहित कन्याओं और मेहमानों का बेडरूम उत्तर- पश्चिम दिशा में होना चाहिए। क्योंकि ये दिशा आवागमन से संबंधित होती है।

इस दिशा में नहीं होना चाहिए बेडरूम -

  • उत्तर- पूर्व दिशा में बेडरूम नहीं होना चाहिए क्योंकि ये दिशा देवी- देवताओं का स्थान है। और इस दिशा में बेडरूम होने से धन की हानि व अशांति बनी रहती है।
  • दक्षिण-पूर्व में भी बेडरूम नहीं होना चाहिए क्योंकि ये दिशा अग्नि कोण है जोकि आक्रामक रवैये से संबंधित है।
  • घर के मध्य भाग में बेडरूम होना सही नहीं माना जाता है क्योंकि इस भाग को ब्रह्म स्थान कहा जाता है।

बेडरूम की सबसे इर्म्पोटेंट चीज है पलंग। वास्तु के अनुसार पलंग दक्षिण या दक्षिण-पश्चिम दिशा में होना चाहिए। पलंग को दक्षिण दिशा की दीवार के साथ होना चाहिए। सोते समय सिर दक्षिण की ओर और पैर उत्तर में होने चाहिए। ध्यान रहे पलंग दीवार के एकदम बीच में होना चाहिए। यही पलंग की बेडरूम में एकदम सही दिशा है।

पलंग के बाद बारी आती है स्टडी टेबल की आजकल अलग से स्टडी रूम बनाने का चलन लगभग खत्म हो गया है। अब तो बेडरूम में ही स्टडी कॉर्नर बनाया जाने लगा है। वास्तु के अनुसार स्टडी टेबल पूर्व दिशा में रखें और ध्यान रखें की पढ़ते समय आपका चेहरा पूर्व की तरफ ही होना चाहिए। दक्षिण की ओर टेबल कभी भी न रखें यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है।

स्टडी टेबल के बाद बात करते हैं शोपीस और पेटिंग्स की। वास्तु के अनुसार बेडरूम में रामायण, महाभारत और किसी भी प्रकार के लड़ाई के दृश्य, ऐन्द्रजालिक पेंटिंग, पत्थर और लकड़ी की बनी राक्षसों की मूर्तियां, रोते हुए व्यक्ति की मूर्ति, जानवरो जैसे सांप, गिद्व, उल्लू, कौवा, बाज आदि के चित्र भी नहीं लगाने चाहिएं। बेडरूम में आप फूलों, झरनों, प्रकृति के मनोरम दृश्य की पेंटिंग्स लगा सकते हैं। वास्तु के अनुसार, पेंटिंग्स की सही दिशा उत्तर दिशा है। दीवार घड़ी भी हमेशा उत्तर दिशा की दीवार पर ही लगानी चाहिए।

मिरर बेडरूम की एक खास जरूरत है। वास्तु के अनुसार मिरर या ड्रेसिंग टेबल को बेड के सामने नहीं रखना चाहिए। मिरर की बेडरूम में सही दिशा है उत्तर-पूर्व, इससे घर के सदस्यों के मान सम्मान में बढोतरी होती है। इसके अलावा किसी दूसरी दिशा में मिरर का लगाना अशुभ माना जाता है।

बेडरूम के दरवाजे की बात करें, तो वास्तु के अनुसार दरवाजा कभी भी बेड के सामने नहीं खुलना चाहिए। दरवाजे हमेशा अंदर की ओर ही खुलने चाहिए। इससे पॉजीटीव एनर्जी घर में आती है। दरवाजा हमेशा पूर्व में होना चाहिए। वास्तु में गोल शेप वाले दरवाजों को अशुभ माना जाता है। दरवाजे हमेशा चकोर होने चाहिएं।

दरवाजे के साथ-साथ खिडकियां भी पूर्व की दिशा में होनी चाहिए। यदि आपके बेडरूम में खिडकियां दक्षिण या पश्चिम दिशा में हो तो उन्हे पर्दों से ढककर रखना चाहिए।

आजकल अटैच टॉयलेट का चलन है। लेकिन वास्तु की माने तो बेडरूम में टॉयलेट का कोई भी स्थान नहीं है। फिर भी यदि अटैच टॉयलेट बनवाना ही है तो उसकी दिशा दक्षिण में होनी चाहिए।

वास्तु के अनुसार, कमरे की पूर्व और उत्तर की दिशा को खाली छोड़ना चाहिए। इन दिशाओं से आने वाली हवाओं और सूर्य की रोशनी में किसी भी प्रकार की कोई अड़चन नहीं आनी चाहिए इसीलिए इन दिशाओं में कोई भी भारी सामान न रखें। इन दोनों दिशाओं से ही रूम में पॉजीटीव एनर्जी आती है। भारी सामान जैसे सोफा, अलमारी आदि को आप दक्षिण और पश्चिम की दिशा में रख सकते है।

बेडरूम घर का ऐसा स्थान है, जहां व्यक्ति सारे दिन का कामकाज खत्म करके चैन से परिवार के साथ कुछ समय बिताता है। या यूं भी कह सकते हैं कि व्यक्ति दोबारा से अपनी ऊर्जा में आ जाता है। जो उसको सारे दिन के कार्यों के लिए, खुश रहने के लिए चाहिए होती है। यहीं पर वह स्वयं को सहज भाव में महसूस करता है इसलिए इस जगह की साफ-सफाई और आंतरिक साज-सज्जा पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

1. जब घर का मुखिया दक्षिण-पश्चिम में बने शयन कक्ष में रहता है, तो परिवार में भी उसका बाकी सदस्यों के साथ तालमेल बेहतर बनता है।
2. यहां का यह कक्ष आकार की दृष्टि से वर्गाकार या आयताकार हो। यहां के शयन कक्ष की आंतरिक साज-सज्जा वास्तु अनुकूल हो। इस शयन कक्ष का द्वार अंदर की ओर खुले।
3. यहां सोने के लिए पलंग इस तरह लगा हुआ होना चाहिए कि सिर दक्षिण की तरफ न हो। इस तरह सोना स्वास्थ्य के लिए लाभप्रद होता है।
4. यदि पलंग के नीचे कुछ सामान रखने का स्थान बना हुआ है, तो सीजन के कपड़े रखें। स्टोर की तरह इसका इस्तेमाल न करें। यदि बच्चे के लिए छोटा पलंग भी रखना हो, तो रखा जा सकता है।
5. व्यक्ति के लिए पलंग भी इस तरह से लगा हुआ हो कि दोनों तरफ से इस्तेमाल में लाया जा सके। दीवारों पर शयन कक्ष का रंग ऐसा हो, जो आंखों को न चुभे क्योंकि यहां यदि गहरे रंग होंगे तो कुछ समय तो अच्छे लगेंगे पर बाद में व्यक्ति के स्वभाव में इससे उग्रता आने लगती है। और इसका सीधा असर व्यक्ति के आराम में, उसके स्वभाव में दिखता है।
6. पलंग के ऊपर बीम या परछत्ती नहीं होनी चाहिए। सोते समय यह ध्यान रखें कि पैर दरवाजे की तरफ न हों। शयन कक्ष में कपड़े वगैरह रखने की अलमारी दक्षिण-पश्चिम दीवार से लगी हुई हो।
7. ड्रेसिंग टेबल पलंग के दाएं या बाएं रख सकते हैं, सामने नहीं। यहां कमरे में ठीक सामने की ओर पूरे परिवार के साथ वाली फोटो फ्रेम की हुई लगाएं। कमरे में अकेले पति-पत्नी की फोटो भी पश्चिम की दीवार के साथ लगा सकते हैं।
8. कमरे के अंदर कभी भी गमले न लगाएं। पोस्टर भी फूलों का लगाएं। कभी भी डूबते हुए जहाज का पोस्टर शयन कक्ष में न लगाएं।
9. शयन कक्ष में कभी-कभी ऑयल डिफ्यूजर का उपयोग भी किया जा सकता है। इसमें ऑयल अपनी पसंद के अनुसार लगा सकते हैं। पॉट पौरी भी शयन कक्ष में रखना अच्छा होता है, पर समय-समय पर देखते रहें कि वह फ्रेश हो।
10. इसी के साथ यदि रोज क्वॉट्र्ज भी कक्ष में रखा है, तो और भी बेहतर वाइब्स आने लगती हैं, जिनका असर रिश्तों में और हमारे मन, स्वभाव पर भी पड़ता है।

निम्न प्रकार के बेडरूम (Bedroom) वास्तु के अनुकूल होते है —  

1- मास्टर बेडरूम के लिए घर में नैर्रित्य कोण सर्वोतम होता है।

2- इसके अलावा पश्चिम या दक्षिण में बना बेडरूम दूसरा अच्छा विकल्प है।

3- वर्गाकार या आयताकार बेडरूम।

4- बेड की व्यवस्था इस प्रकार हो कि सोते वक्त आपका सिर दक्षिण की तरफ रहे।

5- पूर्व की तरफ सिर रखकर भी सोया जा सकता है।

6- पश्चिम में सिर करके सोना तीसरा बेहतर विकल्प है अगर पहले दो विकल्प संभव न हो तो।

7- बेडरूम की ऊंचाई 10 फीट या इससे ज्यादा हो।

8- प्राकृतिक रोशनी और हवा की पर्याप्त व्यवस्था हो।

9- आदर्श शयन कक्ष का क्षेत्रफल 180 वर्ग फीट माना गया है।

10- बेड को बेडरूम की नैर्रित्य दिशा में रखे।

11- बेड को कमरे की दक्षिणी और पश्चिमी दोनों ही दीवारों से थोडा दूर रखे।

12- बेडरूम में भारी सामान या फर्नीचर दक्षिण या पश्चिम दिशा में रखे।

13- टेलीविज़न को उत्तर दिशा वाली दीवार पर रखे।

14- शयन कक्ष मुख्य द्वार से अधिकतम दुरी पर हो।

15- शयन कक्ष में केवल एक प्रवेश द्वार हो।

16- प्रवेश द्वार उत्तरी ईशान या पूर्वी ईशान कोण की तरफ हो।

17- प्रवेश द्वार के विपरीत दिशा में थोडा हटकर रोशनदान या खिड़की की व्यवस्था हो।

18- शयन कक्ष का ब्रह्मस्थान हमेशा खाली रखे।

19- हीटर आग्नेय कोण (दक्षिण-पूर्व) दिशा में रखे।

20- एयर कंडिशनर दक्षिण या पश्चिम की दीवार पर रखे।

निम्न प्रकार के बेडरूम (Bedroom) वास्तु के नियमो के विपरीत होते है —

1- ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) में मास्टर बेडरूम बनाना।

2- आग्नेय कोण में बेडरूम।

3- वायव्य कोण में मास्टर बेडरूम की अवस्थिति।

4- बेड के ऊपर किसी प्रकार का बीम, आर्च या भारी निर्माण करना।

5- बेड के सामने किसी द्वार का होना।

6- बेड के सामने दर्पण का होना।

7- उत्तर दिशा की तरफ सिर करके सोना।

8- कमरे की दीवारों पर अधिक गहरे रंगों का प्रयोग।

9- कमरे की दीवारों पर वीभत्स, डरावने चित्रों या तस्वीरों को लगाना।

10- प्राकृतिक हवा व रोशनी की व्यवस्था न होना।

11- बेडरूम का दरवाजा नैर्रित्य दिशा में होना।

बेडरूम हमारे घर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है, क्योंकि यहीं हम आराम करते हैं और अपने जीवन से जुड़े निजी अनुभव शेयर करते हैं। हमारे जीवन का एक बहुत बड़ा समय बेडरूम में ही सोते हुए गुजरता है। कई बार बेडरूम या पलंग के वास्तु विपरीत होने के कारण इसका असर हमारी कार्यक्षमता और लव लाइफ पर भी पड़ सकता है। यदि वास्तु के अनुसार बेडरूम में कुछ खास चीजें रखीं जाएं या कुछ खास टिप्स अपनाएं जाएं तो पति-पत्नी के बीच विवाद होने की संभावना बहुत कम हो जाती है और रोमांस लंबे समय तक बना रहता है। ये वास्तु टिप्स इस प्रकार हैं-

1. बेडरूम में खिड़की अवश्य होना चाहिए। सुबह की किरणें बेडरूम में प्रवेश करने से स्वास्थ्य बेहतर रहता है। कभी भी मुख्य द्वार की ओर पैर करके न सोएं। पलंग के सम्मुख दर्पण नहीं होना चाहिए। ऐसा करने से आप सदैव व्याकुल व परेशान रहेंगे।

2. पति-पत्नी के प्रतीक के रूप में बेडरूम में दो सुंदर सजावटी गमले रखें। इनसे आपका वैवाहिक जीवन सुखमय होगा और यदि आपकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है और इसी वजह से दांपत्य जीवन सुखमय नहीं है तो सुंदर से बाउल में पवित्र क्रिस्टल को चावल के दानों के साथ रखें।

3. पति-पत्नी के बीच प्रेम बढ़ाने के लिए बेडरूम के दक्षिण-पश्चिम भाग में कांच या सिरेमिक पॉट में छोटे-छोटे पत्थर या क्रिस्टल्स डालकर लाल रंग की दो मोमबत्तियां जलाएं। इससे सकारात्मक ऊर्जा फैलेगी और आपकी जोड़ी सलामत रहेगी।

4. बेडरूम में पलंग सदैव दक्षिण दिशा में रखना चाहिए तथा सोते समय सिर उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। यदि ऐसा नहीं कर सकते तो पश्चिम दिशा में पलंग रखा जा सकता है। इस स्थिति में सोते समय मुख पूर्व की ओर व सिरहाना पश्चिम की ओर रहना चाहिए।

5. वास्तु शास्त्र के अनुसार पूर्व की ओर तथा दक्षिण की ओर मुख करके सोना सुखदायक होता है। उत्तर की ओर मुख करके नहीं सोना चाहिए। उत्तर की ओर मुख करके सोने से नींद नहीं आती है और आती है तो बुरे सपने आते हैं। घर का मुख्य बेडरूम सदैव नैऋत्य (पश्चिम-दक्षिण) कोण में बनाना चाहिए। मुख्य बेडरूम वह होता है, जिसमें गृहस्वामी सोता है।

6. बेडरूम सजाकर रखें, वहां कबाड़ न जमा होने दें। ध्यान रखें की वहां साइड टेबल पर कोई भी वस्तु धूल भरी, बेतरतीब और बिखरी हुई न हो। प्यार बढ़ाने के लिए सिरेमिक की बनी विंड चाइम्स का प्रयोग करें।

7. लव बर्ड, मैंडरेन डक जैसे पक्षी प्रेम के प्रतीक हैं, इनकी छोटी मूर्तियों का जोड़ा अपने बेडरूम में रखें। इनसे दांपत्य जीवन खुशहाल रहेगा। बेडरूम में इस बात का विशेष ध्यान रखें कि वहां पानी की तस्वीर वाली पेंटिंग हर्गिज न लगाएं इसके स्थान पर रोमांटिक कलाकृति जैसे युगल पक्षी की तस्वीर लगा सकते हैं, ये तस्वीर आपकी लाइफ को रोमांस से भर देगी।

8. बेडरूम में ड्रेसिंग टेबल कभी भी खिड़की के सामने न रखें क्योंकि खिड़की से आने वाला प्रकाश परावर्तित होने के कारण परेशानी उत्पन्न करेगा। पलंग के सामने खिड़की न होकर ठोस दीवार होना चाहिए। बेडरूम में फर्नीचर धनुषाकार, अर्ध चन्द्राकार या वृत्ताकार नहीं होने चाहिए, इससे घर के सदस्यों का स्वास्थ्य बिगड़ा रहेगा।

9. पति-पत्नी के बीच रोमांस बना रहे, इसके लिए बेडरूम में दक्षिण-पश्चिम दिशा में दिल की आकृति का रोज क्वाट्र्ज रखें।

10. आदर्शवादी चित्र आत्मबल को बढ़ाते हैं और दांपत्य जीवन भी आनन्दमय व विश्वस्त बना रहता है। इसलिए बेडरूम में राधाकृष्ण की तस्वीर लगाएं तो बेहतर रहेगा। बेडरूम में पलंग इस प्रकार रखें कि वह दरवाजे के पास न हो, ऐसा होने से मन में अशांति व व्याकुलता बनी रहेगी।

11. शयनकक्ष में पलंग के दाईं ओर छोटी टेबल आवश्यक वस्तु रखने के लिए रख सकते हैं। शयनकक्ष में प्रकाश व्यवस्था ऐसी हो कि पलंग पर सीधा प्रकाश नहीं पड़े। प्रकाश सदैव पीछे या बांई ओर से आना चाहिए। पलंग के सामने की दीवार पर प्रेरक व रमणीय चित्र लगाने चाहिए।

12. बेडरूम के दक्षिण-पश्चिम में क्रिस्टल ग्लास के बने झाडफ़ानूस का इस्तेमाल करना चाहिए। इसमें लाल बल्ब लगाएं। ये बहुत ही खास उपाय है। बेडरूम के दक्षिण-पश्चिम भाग में हमेशा पृथ्वी या अग्नि से जुड़े रंगों का ही प्रयोग करना बेहतर रहता है। पर्दे, कुशन, खिड़कियों आदि में इनका उपयोग ठीक रहता है। लाल रंग रोमांस को दर्शाता है। अगर इसका प्रयोग ज्यादा गहरा लगे तो गुलाबी रंग करवा लें।

यदि आप वैवाहिक जीवन में ख़ुशी चाहते हैं, तो इस बात का विशेष ध्यान रखें कि बेडरूम हवादार और शांत हो। कमरे में होनेवाली बातचीत की आवाज़ बाहर न जाने पाए। इससे दांपत्य जीवन में मिठास बढ़ती है।

* हर पूर्णिमा के दिन सोने के पानी (कोई भी गोल्ड ज्वेलरी को पानी में डालकर निकाल लें और इस पानी का इस्तेमाल करें) से स्वस्तिक बनाएं।

* बेडरूम घर का सबसे ख़ास हिस्सा होता है। यहां रखी हर चीज़ का वैवाहिक जीवन पर प्रभाव पड़ता है, जैसे- फोटो, फ्लावर पॉट, पलंग आदि। यहां  पति-पत्नी अपना मुस्कुराता हुआ साथ का फोटो लगा सकते हैं, पर फोटो पैरों की ओर न लगाएं।

* कमरे में रोमांटिक पोज़वाले युगल पक्षी की तस्वीर लगाएं।

* रोमांटिक पोज़वाले सेक्सी क्रिस्टल जोड़े व फोटो से बेडरूम को सजाएं।

* हर अमावस्या को काले तिल उत्तर/पश्‍चिम कोने में रखें।

* रोमांस व प्राइवेसी बनी रहे, इसके लिए ध्यान रहे कि बेडरूम की खिड़की दूसरे कमरे में न खुले।

* चांदी की कटोरी में कपूर रखें।

* आपसी प्यार और बेडरूम की ख़ूबसूरती के लिए मनी प्लांट्स भी लगाए जाते हैं। ये शुक्र के कारक हैं। मनी प्लांट लगाने से पति-पत्नी के संबंध मधुर  होते हैं।

* बेडरूम में हल्की गुलाबी रंग की रोशनी होने से कपल्स में प्रेम बना रहता है।

* शिव रूद्राक्ष गुलाबजल में भिगोकर रखें।

* वास्तु के अनुसार हमेशा दक्षिण या पूर्व दिशा में सिर करके सोएं, ताकि पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र के अनुसार आप दीर्घायु और गहरी नींद प्राप्त कर सकें।  आरामदायक व भरपूर नींद से दांपत्य जीवन अधिक सुखद बनता है।

* पत्नी पति के बाईं ओर सोए।

* यदि कमरे में ड्रेसिंग टेबल हो, तो इस बात का ख़्याल रखें कि सोते समय आपका प्रतिबिंब आईने पर न पड़ने पाए। यदि ऐसा हो, तो आईने को ढंक दें।

* लव बर्ड, मैंडरीन डक जैसे पक्षी प्रेम के प्रतीक हैं। इनकी छोटी मूर्तियों का जोड़ा कमरे में रखें।

* बेडरूम में हल्की व ख़ूबसूरत लाइट व्यवस्था हो, पर रोशनी सीधी पलंग पर न पड़े।

* वास्तु के अनुसार बेडरूम में बाथरूम नहीं होना चाहिए, क्योंकि दोनों की ऊर्जाओं का परस्पर आदान-प्रदान सेहत के लिए अच्छा नहीं होता।

* फिर भी बेडरूम में बाथरूम रखना चाहते हों, तो नैऋत्य कोण में बनवाएं। यदि ऐसा संभव न हो, तो वायव्य कोण (उत्तर-पश्‍चिम) में भी बाथरूम  बनवाया जा सकता है।

* अगर बेडरूम में बाथरूम है, तो हर पूर्णिमा या शुक्रवार को नमक के पानी से बाथरूम धोएं।

* ऐसे कपल्स, जो संतान सुख पाना चाहते हैं, वे श्रीकृष्ण का बाल रूप दर्शानेवाली फोटो अपने बेडरूम में लगाएं।

* बेड के नीचे मोर पंख रखें।

* बेडरूम में पूजा स्थल बनवाना या देवी-देवताओं की तस्वीर लगाना वास्तु शास्त्र के अनुसार ठीक नहीं है, फिर भी यदि चाहें, तो राधा-कृष्ण की तस्वीर बेडरूम में लगा सकते हैं।

* यदि आपकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है और इसी वजह सेे दांपत्य जीवन सुखमय नहीं है, तो सुंदर से बाउल मेें पवित्र क्रिस्टल को चावल के दानों के  साथ मिलाकर रखें।

* क्रिस्टल क्वार्ट्ज़ स्टोन के बने शोपीस पति-पत्नी के प्रेम को बढ़ाते हैं। ये क्रिस्टल गुलाबी रंग के होते हैं और इनसे सकारात्मक ऊर्जा का स्तर बहुत अच्छा होता है।

* लाल कपड़े की थैली में तांबे व पीतल के सिक्के रखें।

* कभी-कभी बेडरूम की खिड़की से नकारात्मक वस्तुएं दिखाई देती हैं, जैसे- सूखा पेड़, फैक्ट्री की चिमनी से निकलता हुआ धुआं आदि। ऐसे दृश्यों से  बचने के लिए खिड़कियों पर परदा डाल दें।

शयन कक्ष घर का वो स्थान होता है जहाँ आपका अवचेतन मस्तिष्क पूरे दिन में सबसे ज्यादा सक्रिय होता है। इस वक्त आपके मस्तिष्क में प्रविष्ट भावनाए और उनसे उत्पन्न विचार आपके जीवन पर बहुत गहरा प्रभाव डालते है। इसीलिए बचपन से ही हमें यह सिखाया जाता रहा है कि सोने से पहले हमें सकारात्मक चीजों के बारे में विचार कर ही सोना चाहिए। अतएव शयनकक्ष के निर्माण के वक्त वास्तु सम्बन्धी सभी पहलुओं पर विचार कर ही कोई कदम उठाये।

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